
जीवन के इक मोड़ पर,
जब नयी राह चलने लगे
तेरी आँखों के चिराग
इस दिल मे जलने लगे ।
जब नयी राह चलने लगे
तेरी आँखों के चिराग
इस दिल मे जलने लगे ।
दर्द जो तूने दिया,
उसके लिये तेरा शुक्रिया
अब तो अपने जिस्म में
कई रंग घुलने लगे ।
मुरझा रहे इस पेड़ को
तूने दिया जो गंगाजल,
अब तो अपने चारों तरफ
फूल ही फूल खिलने लगे ।
बारिशों के मौसम में
तुम भी बरसे इस तरह
पुराने ज़ख्मों के दाग सब
अब धीरे धीरे धुलने लगे .
7 टिप्पणियां:
आप आशाएँ जगाते हैं अपनी कविता से।
बारिशों के मौसम में
तुम भी बरसे इस तरह
पुराने ज़ख्मों के दाग सब
अब धीरे धीरे धुलने लगे
छोटी सी कविता बहुत असर रखती है।
bahut khoob...manu...bahut achhi rachna hai...aise hi likhte raho...tumhari ye chhoti chhoti rachnaayen dil ko andar tak chhu jaati hain....
bahut ache arya manu ji
bahut hi sundar likhi hai aapne yah rachana..
दर्द जो तूने दिया,
उसके लिये तेरा शुक्रिया
अब तो अपने जिस्म में
कई रंग घुलने लगे ।
mujhe yah lines bahut bahut acchi lagi ...
itni sunder kavita padhane ke liye thanx.
aapne bahut accha likha hai. kuch lines to sidhe dil me utar rahi thi.
jis tarah se aapne "dard" ko jatatya, dil ko chu gaya
बारिशों के मौसम में
तुम भी बरसे इस तरह
पुराने ज़ख्मों के दाग सब
अब धीरे धीरे धुलने लगे .
are janab ye kya likh dala...likha hai ya hame katal kiya hai, amazing yaar, bahut badiya lga ye sher........
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