रविवार, 10 जून 2007


"मेरी सारी कल्पनायें उस समय ध्वँस हुई जाती है,
जब ज़माने की आंधियाँ मेरा आशियां मिटा जाती है ।
पानी की लहरों सा उभरा था प्यार तेरा मेरा,
हादसा ये होता है, कि हरदम दूरियाँ बढती जाती है ।"

3 टिप्‍पणियां:

vishal ने कहा…

क्षणिकायें अच्छी बन पडी है, और साथ मे विषय से जुडे राजस्थानी चित्र चार चाँद लगा रहे है ।
आन्दोलनों से उबरे राजस्थान की रंगीनियत को आपने अपनी साइट पर स्थान दिया, इस हेतु साधुवाद ।
पिछली बार आपकी साइट पर उदयपुर का बोलबाला था तो इस बार सिर्फ विरह रस को प्राथमिकता है, कारण स्पष्ट करें तो हम जैसे आपके चाहने वालों को सुविधा होगी ।

शैलेश भारतवासी ने कहा…

बहुत बारीक बात है इस क्षणिका में।

shaveta ने कहा…

bahut ache